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गांधी धोती शताब्दी समारोह मनाया
महात्मा गांधी द्वारा “धोती को अपने परिधान के रूप में अपनाने” के अवसर का शताब्दी वर्ष मनाया गया। इस स्मारक शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘रामराज कॉटन’ ने तिरुपुर में “धोती-100” के रूप में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जिसमें 100 बलिदानियों का पुण्य स्मरण करते हुए 100 बुनकरों को सम्मानित किया गया एवं 100 पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम के दौरान कलाक्षेत्र फाउंडेशन, चेन्नई के कलाकारों ने “गांधी विझियिल रामराज” नामक परंपरागत नृत्य नाटिका प्रस्तुत की।
समारोह का उद्घाटन करते हुए रामराज कॉटन के प्रबंध निदेशक श्री के. आर. नटराजन ने कहा कि हमने महात्मा गांधी के परिधान को “राष्ट्रीय परिधान एवं पहचान“ के प्रतीक में परिवर्तित कर दिया है और धोती में निरंतर नवीनता लाते हुए युवा भारत को नए तरीके की, सहज और आरामदेह धोतियों से प्रेरित किया है। इसके परिणामस्वरूप अब धोतियां विशिष्ट शैली की अभिव्यक्ति तथा गर्वोन्नत भारतीय परिधान के रूप में दिखाई देती हैं।
श्री नटराजन ने आगे कहा कि पिछले 40 वर्षों से अपने महान लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए हमने पूरी तन्मयता तथा चेष्टा के साथ 40,000 बुनकरों के ‘उत्कृष्टता चक्र’ को निरंतर सक्रिय रखा है। इस क्रम में हमने फैशन ब्रांडों के एक संसार का सृजन करने के साथ ही बुनकरों का जीवन समृद्ध किया है।
समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय विद्या भवन, कोयंबटूर के अध्यक्ष डा. बी.के. कृष्णराज वनवरयार ने इस अवसर पर ‘महात्मावी कोंडाडुवोम’ शीर्षक से एक पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक की पहली प्रति कोयंबटूर स्थित रूट्स कम्पनी समूह के अध्यक्ष श्री के, रामास्वामी ने प्राप्त की।


